Café Pushkin, Tverskoy Boulevard पर स्थित रूसी कुज़ीन का रेस्टोरेंट है, जिसे आंद्रेय देल्लोस (Andrey Dellos) ने क्रांति-पूर्व मॉस्को के साहित्यिक मिथक की जीती-जागती मिसाल के तौर पर बनाया है।

रेस्टोरेंट के तीन हॉल थिएटर के सेट डिज़ाइन के उसूल पर बनाए गए हैं, जहां हर डीटेल पूरी इमेज को सहारा देता है। पैनोरमिक खिड़कियों और पौधों वाली थीम वाला "फ़ार्मेसी" हॉल 19वीं-20वीं सदी के मोड़ की किसी फ़्रेंच ऑरेंज़री जैसा लगता है। "मेज़ानाइन" हॉल शाही अंदाज़ में बना है: सोना, संगमरमर के खंभे, भारी कपड़े। लेकिन इस जगह की असली पहचान बन गया है "लाइब्रेरी" हॉल — मोल्डेड सीलिंग, गहरे रंग की लकड़ी के नक़्क़ाशीदार फ़र्नीचर और 18वीं से 20वीं सदी की शुरुआत तक के रूसी क्लासिक लेखकों के एंटीक संस्करणों से भरी विशाल अलमारियों वाला हॉल। किताबों के पास पुराने ग्लोब, माइक्रोस्कोप और दूसरी ऐसी चीज़ें रखी हैं, जो किसी कुलीन जागीर के अध्ययन कक्ष में फ़बती हैं। इंटीरियर जान-बूझकर भरा-पूरा रखा गया है: डीटेल्स की भरमार पिछली सदी से भी पुराने मॉस्को के ड्रॉइंग रूम्स में उतर जाने का एहसास देती है — घना, लगभग छूने लायक़।

हमारे रेस्टोरेंट गाइड की टीम के मुताबिक़, यहां आप सिर्फ़ खाने के लिए नहीं, बल्कि सबसे पहले एक बेमिसाल, ऊंचे दर्जे के माहौल में डूब जाने के लिए पैसे चुकाते हैं।

रेस्टोरेंट का नाम एक अनपेक्षित सोर्स से आया — फ़्रेंच शानसोन्ये ज़िलबैर बेको (Gilbert Bécaud) के गाने "Natalie" से, जिसमें किरदार मॉस्को के एक काल्पनिक कैफ़े में गरम चॉकलेट पीने जाते हैं। यही साहित्यिक छवि इस कॉन्सेप्ट की बुनियाद बनी: यह जगह किसी ऐतिहासिक तथ्य की पुनर्रचना के तौर पर नहीं, बल्कि पुश्किन के दौर के रूस की रूमानी छवि के जीते-जागते रूप के तौर पर बनाई गई थी।

रेस्टोरेंट का मेन्यू शेफ़ आंद्रेय मखोव (Andrey Makhov) ने तैयार किया था और आज भी वही इसे संभालते हैं — यहां आने से पहले वे Metropol होटल में काम कर चुके थे और मोनाको में रशियन कुज़ीन की गैस्ट्रोनॉमिक प्रज़ेंटेशन आयोजित कर चुके थे। उनका रेसिपी अप्रोच 19वीं सदी की नेशनल परंपराओं पर आधारित है, जिन्हें बिना पहचान खोए नए सिरे से गढ़ा गया है। मेन्यू में हैं बीफ़स्टेक "शातोब्रियां", पॉज़ार्स्की ज़्रज़ी, गेम मीट और नदी की मछली से बनी डिशेज़। हिरण को मैच्योर इतालवी चीज़ और खाने लायक़ फूलों के साथ सर्व किया जाता है, स्टर्लेट (sterlet) को कैवियार बेस्ड गाढ़े सॉस में, और सोल मछली को हरे शतावर के साथ। सर्विंग स्टाइल पिछली सदी से भी पुराने गैस्ट्रोनॉमिक शिष्टाचार की याद दिलाती है, जहां डिश की शक्ल उसके मायने से अलग नहीं होती थी।

रेस्टोरेंट के शुरुआती सालों से मेन्यू में बनी रहने वाली डिशेज़ में से एक है ऐतिहासिक रेसिपी वाले पॉज़ार्स्की कटलेट। इन्हें ठंडे चिकन मीट से बनाया जाता है, और साइज़ में यह बड़े वील चॉप के क़रीब होते हैं। इन्हें छिलके समेत लहसुन और थाइम के साथ भुने आलू और क्रीम व सफ़ेद वाइन में पके शैम्पीन्यों मशरूम के सॉस के साथ सर्व किया जाता है।

मेन्यू का डेज़र्ट सेक्शन अपने आप में एक अलग कहानी है। "Limonnik" और "Gzhel" — दो सिग्नेचर पोज़िशन्स हैं, जो परमानेंट बन चुकी हैं। "Gzhel" कॉटेज-चीज़ क्रीम और चॉकलेट-वेफ़र की कुरकुरी लेयर के कॉम्बिनेशन पर बना है। ज़्यादातर सिग्नेचर डिशेज़ की रेसिपीज़ आंद्रेय मखोव (Andrey Makhov) ने 2008 में छपी अपनी किताब "आधुनिक रसोई के क्लासिक्स" में इकट्ठा कीं — यह एक दुर्लभ मामला है, जब रेस्टोरेंट की किचन को ख़ुद लेखक ने दस्तावेज़ी रूप दिया हो।

हमारे सीक्रेट गेस्ट्स ने डिनर के लिए 10 में से 8 अंक दिए — डीटेल्स में तालमेल के लिए: इंटीरियर, डिश की सर्विंग और हॉल की सर्विस मिलकर एक ऐसा बयान बनाते हैं, जो पूरी शाम बिखरता नहीं।

शेफ़ आंद्रेय मखोव (Andrey Makhov) रेस्टोरेंट के मेहमानों को ऐसे लोग बताते हैं, जो रूसी कुज़ीन को अच्छी तरह समझते हैं और यहां सिर्फ़ खाने के लिए नहीं, बल्कि एक ख़ास माहौल महसूस करने आते हैं। उनकी नज़र में, मेहमानों के बीच अब उन लोगों के बच्चे भी अक्सर दिखते हैं, जिन्होंने 1990 के दशक के आख़िर में पहली बार यह जगह आज़माई थी — यह ख़ुद इस बात का सबूत है कि यहां की खिंचाव सिर्फ़ मेन्यू से नहीं समझाई जा सकती।